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चुनाव 21 May, 2026

योगी सरकार का बड़ा फैसला! यूपी पंचायत चुनाव में OBC आरक्षण तय करेगा नया आयोग

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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर योगी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath की कैबिनेट ने पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण तय करने के लिए नए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दे दी है। इस फैसले को पंचायत चुनाव की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि लंबे समय से OBC आरक्षण को लेकर कानूनी और प्रशासनिक अड़चनें बनी हुई थीं।
 

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को आरक्षण देने का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से विवादों में रहा है। अदालतों ने साफ कहा था कि बिना “ट्रिपल टेस्ट” प्रक्रिया पूरी किए OBC आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता। इसी कारण पंचायत चुनावों की प्रक्रिया प्रभावित हो रही थी।

अब योगी सरकार ने इसी समस्या के समाधान के लिए नए पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी दी है।
Uttar Pradesh Government's big decision; caste certificate to be issued in  two days without verification
आयोग में कौन-कौन होंगे ?

सरकार द्वारा गठित इस आयोग में कुल 5 सदस्य शामिल होंगे। जानकारी के मुताबिक—

  • आयोग के अध्यक्ष एक रिटायर्ड हाईकोर्ट जज होंगे
  • अन्य सदस्य सामाजिक, प्रशासनिक और पिछड़ा वर्ग मामलों के विशेषज्ञ होंगे
  • आयोग को OBC वर्ग की वास्तविक सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करने की जिम्मेदारी दी जाएगी
    UP Govt appoints Ram Autar Singh Chairman of OBC Commission for Panchayat  Election Reservation 4 retired ADJ IAS member यूपी पिछड़ा आयोग के चेयरमैन  बने राम औतार सिंह, कमीशन में दो-दो रिटायर्ड
    आयोग क्या करेगा ?

यह आयोग राज्यभर में सर्वे और आंकड़ों के आधार पर यह तय करेगा कि पंचायत चुनावों में OBC वर्ग की कितनी हिस्सेदारी होनी चाहिए।

आयोग इन प्रमुख बिंदुओं पर काम करेगा:

  • पंचायत स्तर पर OBC आबादी का आंकलन
  • सामाजिक और शैक्षणिक पिछड़ेपन का अध्ययन
  • राजनीतिक प्रतिनिधित्व की स्थिति की जांच
  • ग्राम प्रधान, बीडीसी और जिला पंचायत सीटों पर आरक्षण का निर्धारण

क्या होता है “Triple Test Rule”?

सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय निकाय चुनावों में OBC आरक्षण लागू करने के लिए “Triple Test Rule” अनिवार्य बताया था। इसके तहत तीन प्रमुख शर्तें होती हैं:

1. समर्पित आयोग का गठन

राज्य सरकार को पिछड़े वर्ग की स्थिति का अध्ययन करने के लिए एक विशेष आयोग बनाना होता है।

2. डेटा आधारित रिपोर्ट

आयोग को यह साबित करना होता है कि संबंधित वर्ग वास्तव में राजनीतिक रूप से पिछड़ा है।

3. आरक्षण की सीमा तय करना

आरक्षण इस तरह तय किया जाए कि कुल आरक्षण 50% सीमा से अधिक न हो।

इन्हीं नियमों का पालन न होने की वजह से पहले पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण पर सवाल उठे थे।
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पंचायत चुनाव पर क्या पड़ेगा असर ?

सरकार का मानना है कि आयोग बनने के बाद पंचायत चुनावों में OBC आरक्षण का रास्ता साफ हो जाएगा। हालांकि आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है, इसलिए चुनाव प्रक्रिया में कुछ और देरी संभव मानी जा रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से चुनाव कानूनी विवादों से बच सकते हैं और आरक्षण व्यवस्था अधिक मजबूत तरीके से लागू हो सकेगी।

विपक्ष क्या कह रहा है?

विपक्षी दलों का आरोप है कि सरकार पंचायत चुनावों को टालने के लिए आयोग का सहारा ले रही है। वहीं सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करना जरूरी है, ताकि भविष्य में चुनाव परिणाम कानूनी विवाद में न फंसें।
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क्यों अहम है यह फैसला ?

उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और पंचायत चुनावों का राजनीतिक असर काफी बड़ा माना जाता है। ग्रामीण राजनीति में OBC वर्ग की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में नया आयोग आने वाले पंचायत चुनावों की तस्वीर बदल सकता है।

अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आयोग अपनी रिपोर्ट में क्या सिफारिशें देता है और उसके बाद पंचायत चुनावों की तारीखों का ऐलान कब होता है।
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