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अंतरराष्ट्रीय समाचार 14 May, 2026

क्या ईरान को लेकर अमेरिकी सरकार की मुश्किल बढ़ गई है ?

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नई रिपोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन के दावों पर उठाए सवाल

मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। हाल ही में सामने आई अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने यह संकेत दिया है कि ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को काफी हद तक दोबारा सक्रिय कर लिया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी नेतृत्व लगातार दावा करता रहा कि ईरान की सैन्य क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है।

रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपने कई मिसाइल ठिकानों, मोबाइल लॉन्चर्स और भूमिगत सैन्य सुविधाओं को फिर से चालू कर लिया है। खास तौर पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास स्थित मिसाइल नेटवर्क को तेजी से पुनर्स्थापित किया गया है। बताया जा रहा है कि यहां मौजूद 33 मिसाइल सुविधाओं में से लगभग 30 फिर से ऑपरेशन में आ चुकी हैं।
 

अमेरिकी दावों से अलग तस्वीर

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले दावा किया था कि ईरान की सैन्य शक्ति को भारी नुकसान पहुंचाया गया है और वह लंबे समय तक किसी बड़े युद्ध में टिक नहीं पाएगा। लेकिन नई रिपोर्ट इन दावों पर सवाल खड़े करती दिख रही है।
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खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बावजूद ईरान अपने लगभग 70 प्रतिशत मिसाइल लॉन्चर्स और बड़ी संख्या में पुरानी मिसाइलों को बचाने में सफल रहा। इनमें क्रूज मिसाइल और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम भी शामिल बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा, ईरान के लगभग 90 प्रतिशत भूमिगत स्टोरेज सिस्टम आंशिक या पूरी तरह फिर से काम करने लगे हैं। इस बात की पुष्टि सैटेलाइट इमेज और खुफिया निगरानी तकनीकों के जरिए होने का दावा किया गया है।
 

युद्ध में अमेरिका ने किया भारी हथियारों का इस्तेमाल

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इस संघर्ष के दौरान अमेरिका ने बड़ी मात्रा में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल किया। इनमें लॉन्ग-रेंज क्रूज मिसाइल, टॉमहॉक मिसाइल और पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइल शामिल थीं।

हालांकि अमेरिकी रक्षा विभाग यानी Pentagon ने इन रिपोर्ट्स को खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिका के पास अभी भी पर्याप्त सैन्य क्षमता और हथियार मौजूद हैं।
ईरान युद्ध के कारण अमेरिका की मिसाइल आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है।
 

ईरान की परमाणु सुविधाएं क्यों हैं बड़ी चुनौती ?

अमेरिका ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर बंकर-बस्टर बमों से हमला किया था। इनका उद्देश्य भूमिगत सैन्य और परमाणु संरचनाओं को नष्ट करना होता है। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की कई परमाणु सुविधाएं बेहद गहराई में बनाई गई हैं।

Fordow Fuel Enrichment Plant और Natanz Nuclear Facility जैसे परमाणु संयंत्र जमीन के लगभग 80 से 100 मीटर नीचे स्थित बताए जाते हैं। जबकि कई बंकर-बस्टर बमों की प्रभावी क्षमता इससे कम मानी जाती है।
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इसी वजह से अमेरिका ने कई जगहों पर सीधे अंदर तक नुकसान पहुंचाने के बजाय बंकरों के प्रवेश मार्गों को निशाना बनाया था। अब रिपोर्ट कहती है कि ईरान उन हिस्सों की मरम्मत कर चुका है और कई सुविधाएं दोबारा सक्रिय हो गई हैं।
 

क्या अमेरिका के लिए बढ़ सकती है रणनीतिक चुनौती ?

अगर ये रिपोर्ट सही साबित होती है तो यह अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए नई रणनीतिक चुनौती बन सकती है। इससे यह भी संकेत मिलता है कि आधुनिक युद्ध में केवल हवाई हमलों से किसी देश की सैन्य क्षमता को पूरी तरह खत्म करना बेहद मुश्किल होता जा रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी भूमिगत सैन्य संरचना और मिसाइल नेटवर्क को इस तरह विकसित किया है कि बड़े हमलों के बाद भी वह तेजी से रिकवरी कर सके।

अब दुनिया की नजर इस बात पर रहेगी कि अमेरिका और ईरान के बीच आगे कूटनीतिक बातचीत बढ़ती है या क्षेत्र में तनाव और गहरा होता है।
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