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राजनीति 13 May, 2026

विपक्ष का नेता रबर स्टैम्प नहीं”: CBI प्रमुख चयन बैठक के बाद Rahul Gandhi ने उठाए पक्षपात के सवाल

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नई दिल्ली: देश की प्रमुख जांच एजेंसी Central Bureau of Investigation यानी CBI के नए निदेशक की नियुक्ति को लेकर राजनीतिक माहौल एक बार फिर गर्म हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता Rahul Gandhi ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा कि विपक्ष की भूमिका केवल “रबर स्टैम्प” बनकर रह जाने वाली नहीं हो सकती।

मंगलवार को आयोजित उच्चस्तरीय चयन समिति की बैठक में राहुल गांधी ने नियुक्ति प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता की कमी का मुद्दा उठाया। सूत्रों के मुताबिक उन्होंने कहा कि CBI जैसी संवेदनशील और शक्तिशाली एजेंसी के प्रमुख की नियुक्ति पूरी तरह स्वतंत्र, निष्पक्ष और लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि उम्मीदवारों के नामों की समीक्षा किस आधार पर की गई और चयन प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से अधिक पारदर्शी क्यों नहीं बनाया गया। उनका कहना था कि जब देश की सबसे महत्वपूर्ण जांच एजेंसी के प्रमुख का चयन हो रहा हो, तब विपक्ष की राय को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, न कि केवल औपचारिकता निभाने के लिए बुलाया जाना चाहिए।
 

केंद्र सरकार पर एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप

बैठक के दौरान कांग्रेस नेता ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग का आरोप भी लगाया। राहुल गांधी ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में CBI और अन्य एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सरकार की आलोचना करने वाले लोगों के खिलाफ किया गया है।

उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जांच एजेंसियों की विश्वसनीयता सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि एजेंसियों पर राजनीतिक प्रभाव का आरोप लगने लगे, तो जनता का भरोसा कमजोर होता है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि निष्पक्ष जांच एजेंसियां लोकतंत्र की रीढ़ होती हैं और उनकी स्वतंत्रता बनाए रखना सरकार की जिम्मेदारी है।
 

कैसे होता है CBI निदेशक का चयन ?

CBI निदेशक की नियुक्ति एक उच्चस्तरीय समिति द्वारा की जाती है। इस समिति में प्रधानमंत्री, भारत के मुख्य न्यायाधीश या उनके प्रतिनिधि, और लोकसभा में विपक्ष के नेता शामिल होते हैं। इसी प्रक्रिया के तहत नए निदेशक के नाम पर चर्चा और अंतिम चयन किया जाता है।

हालांकि विपक्ष लगातार यह आरोप लगाता रहा है कि चयन प्रक्रिया में सरकार का प्रभाव अधिक रहता है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सभी नियुक्तियां निर्धारित नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाती हैं।
 

राजनीतिक बहस तेज

राहुल गांधी के इस बयान के बाद राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। कांग्रेस और विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि विपक्ष बिना वजह संस्थाओं पर सवाल उठाकर भ्रम फैलाने की कोशिश कर रहा है।

आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद और राजनीतिक गलियारों में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है, क्योंकि जांच एजेंसियों की निष्पक्षता को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठते रहे हैं।


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