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चुनाव 04 Jun, 2026

पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, यूपी सरकार से पूछा- आखिर कब होंगे चुनाव ?

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उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चुनाव प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए सरकार से स्पष्ट जवाब मांगा है कि पंचायत चुनाव आखिर कब कराए जाएंगे।

दरअसल, हाईकोर्ट में दाखिल एक याचिका में आरोप लगाया गया था कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद अब तक चुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि संविधान के अनुसार पंचायतों का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है और इसे अनावश्यक रूप से बढ़ाया नहीं जा सकता।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार से अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग की रिपोर्ट और चुनाव की तैयारियों को लेकर विस्तृत जानकारी मांगी। अदालत ने यह भी सवाल उठाया कि चुनाव कराने में आखिर इतनी देरी क्यों हो रही है और अब तक चुनावी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।

हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को भी निर्देश दिया है कि वह चुनाव कराने को लेकर एक स्पष्ट रोडमैप अदालत के समक्ष पेश करे। कोर्ट का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए समय पर चुनाव कराना बेहद जरूरी है।

याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि पंचायत चुनावों में देरी से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है और स्थानीय निकायों के अधिकारों पर भी असर पड़ रहा है। वहीं राज्य सरकार की ओर से OBC आरक्षण और आयोग गठन की प्रक्रिया को चुनाव में देरी का प्रमुख कारण बताया गया है।

अदालत ने साफ संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनावों को अनिश्चितकाल तक टालना स्वीकार नहीं किया जा सकता। अब इस मामले में अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को होगी, जहां सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को अपना विस्तृत पक्ष रखना होगा।

ऐसे में सभी की नजरें अगली सुनवाई पर टिकी हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार अदालत के सवालों का संतोषजनक जवाब दे पाती है या नहीं।


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